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  • बख्शी ग्रन्थावली-7 - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर
    बख्शी जी निबन्ध कला के सौन्दर्यीकरण के लिए एक ही निबन्ध को अनेक शैलियों में अनेक बार लिखते थे। बख्शी के निबन्धों में स्टीवेंसन
  • (१) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के निबंधों की
    उपरोक्त उत्तरों में, हमने पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के निबंधों की विशेषताओं, रांगेय राघव जी की प्रमुख रचनाओं, सुदामा पांडेय जी के
  • पदुमलाल पन्नालाल बख्शी - विकिपीडिया
    डॉ॰ पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (27 मई 1894-28 दिसम्बर 1971) जिन्हें ‘मास्टरजी’ के नाम से भी जाना जाता है, हिंदी के निबंधकार थे। वे राजनांदगांव की
  • पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर
    इन कृतियों में भारतीय एवं पाश्चात्य साहित्य सिद्धान्तों के सामंजस्य एवं विवेचन की चेष्टा की गयी है। 'विश्व साहित्य' में यूरोपीय साहित्य तथा पाश्चात्य काव्य मत पर कुछ फुटकर निबन्ध भी दिये गये हैं। इन पुस्तकों के अतिरिक्त बख्शी की दो अन्य आलोचनात्मक कृतियाँ बाद में प्रकाशित हुईं- 'हिन्दी कहानी साहित्य' और 'हिन्दी उपन्यास साहित्य'। निबन्ध कहानी साहित्य' और 'हिन्दी उपन्यास साहित्य'। निबन्ध लेखन के क्षेत्र में पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी एक विशिष्ट शैलीकार के रूप में सामने आते हैं। इन्होंने जीवन, समाज, धर्म, संस्कृति और साहित्य आदि विभिन्न विषयों पर उच्च कोटि के ललित निबन्ध लिखे हैं। इनके निबन्धों में नाटक की सी रमणीयता और कहानी जैसी रंजकता पायी जाती है। यत्र-तत्र शिष्ट तथा गम्भीर व्यंग्य-विनोद की अवतारणा करते चलना इनके शैलीकार की एक प्रमुख विशेषता है। उनका पहला निबंध ‘सोना निकालने वाली चींटियाँ’ सरस्वती में प्रकाशित हुआ। पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी ने 1929 से 1934 तक अनेक महत्त्वपूर्ण पाठ्यपुस्तकों यथा- पंचपात्र, विश्वसाहित्य, प्रदीप की रचना की। मास्टर जी की उल्लेखनीय सेवा को देखते हुए हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा सन् 1949 में साहित्य वाचस्पति की उपाधि से इनको अलंकृत किया गया। इसके ठीक एक साल बाद वे मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभापति निर्वाचित हुए।
  • खैरागढ़ से साहित्य के शिखर तक: डॉ. बख्शी का प्रेरक जीवन
    बख्शी ने निबंध, आलोचना, उपन्यास, कहानी, यात्रा-वृत्तांत और कविता – सभी विधाओं में महत्वपूर्ण लेखन किया। उनके निबंधों में संवाद की
  • पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के निबंधों का अध्ययन
    संस्कृति एक जटिल पद है। संस्कृति की अधिकांश व्याख्याएं अमूर्त विवेचनाओं में सिमट जाती हैं। दरअसल संस्कृति अमूर्तन नहीं है
  • पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी परिचय - कविता कोश
    इन कृतियों में भारतीय एवं पाश्चात्य साहित्य सिद्धान्तों के सामंजस्य एवं विवेचन की चेष्टा की गयी है। विश्व साहित्य में यूरोपीय साहित्य तथा पाश्चात्य काव्य मत पर कुछ फुटकर निबन्ध भी दिये गये हैं। इन पुस्तकों अतिरिक्त बख्शी जी दो अन्य आलोचनात्मत्मप कृतियाँ बाद में प्रकाशित हुईं
  • पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जीवन परिचय, निबंध संग्रह
    व्याख्यात्मक शैली – यह शैली बख्शीजी के आलोचनात्मक निबन्धों में प्राप्त होती है। विषय- गाम्भीर्य के कारण वाक्य बड़े हो गए हैं, जिससे
  • डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी | जिला राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ सरकार | भारत
    बख्शी जी का जन्म 27 मई 1894 को खैरागढ़ में हुआ था । उनके पिता श्री पुन्नालाल बख्शी एवं माता श्रीमती मनोरमा देवी थीं । जुलाई 1911 में प्रथम
  • 365 दिन, 365 भावनाएँ: बख्शी जी के गीतों से प्रेरित मेरा आत्म-लेखन
    मुझे बचपन से ही अपने माता-पिता ने रामचरितमानस का एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल दिया। हमारे घर में हर सुबह भजन, रामायण के पाठ और





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